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जैन मुनि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने ली समाधि

संत शिरोमणि और दिगंबर जैन धर्म के सबसे बड़े संत आचार्यश्री विद्यासागर महाराज जी ने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि तीर्थ में शनिवार (17.02.2024) देर रात 2:35 बजे अपना शरीर त्याग दिया।

वह 77 वर्ष के थे। आचार्यश्री ने 3 दिन पहले ही समाधि मरण की प्रक्रिया को शुरू कर पूर्ण रूप से अन्न-जल का त्याग कर दिया था और अखंड मौन व्रत ले लिया था। आचार्यश्री काफी दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके शरीर त्यागने का पता चलते ही जैन समाज के लोगों का जुटना शुरू हो गया।

श्री चंद्रगिरि तीर्थ, डोंगरगढ़ में समाधिष्ठ परम पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज का अंतिम डोला रविवार को दोपहर 1 बजे निकाला जाएगा और उनकी देह अग्नि संस्कार के माध्यम से पंचतत्व में विलीन हो जाएगी।

उनका जन्म 10 अक्टूबर 1946 को विद्याधर के रूप में कर्नाटक के बेलगाँव जिले के सदलगा में शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। आचार्य श्री ने आम जनता के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने गरीबों से लेकर जेल के बंदियों के लिए भी काम किया। लोगों में आध्यात्मिक जागृति के लिए अपने प्रयासों के लिए भी वह हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने हिंदी और संस्कृत में अनेक ग्रंथों की रचना की।

जो त्याग आचार्यश्री ने किए थे, वे न केवल जैन धर्म अपितु सम्पूर्ण मानव इतिहास में अद्वितीय थे। आचार्यश्री न केवल जैन समाज बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लोगों द्वारा पूजे जाते थे। ‘वर्तमान के महावीर’ कहलाने वाले आचार्य श्री से पिछले साल 5 नवंबर को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विधानसभा चुनावों से पहले डोंगरगढ़ पहुंच कर आशीर्वाद लिया था जिसकी तस्वीरें उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा की थीं।वरिष्ठ अधिवक्ता अतुल जैन ने बताया की समय-समय पर देश-विदेश के बड़े-बड़े नेता और राजनेता उनके दर्शन करने को जाते रहते थे।

देश भर से गणमान्य व्यक्तियों ने आचार्यश्री के देह त्याग पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

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