पंचकूला में कुशल बिजनेस चैलेंज (केबीसी)- यूथ स्टार्ट-अप महोत्सव का राज्य स्तरीय शिखर सम्मेलन का हुआ भव्य आयोजन
पंचकूला,कुशल बिजनेस चैलेंज (केबीसी)-यूथ स्टार्ट-अप महोत्सव का राज्य स्तरीय शिखर सम्मेलन आज पंचकूला स्थित इंद्रधनुष आॅडिटोरियम में भव्य रूप से आयोजित किया गया। इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में 1979 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं भारत के उपराष्ट्रपति के सचिव रह चुके डॉ. आई. वी. सुब्बा राव उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में स्कूली शिक्षा निदेशक जितेंद्र कुमार, प्राथमिक शिक्षा के महानिदेशक विवेक अग्रवाल तथा संयुक्त राज्य परियोजना निदेशक डॉ. मयंक वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह आयोजन समग्र शिक्षा के अंतर्गत हरियाणा विद्यालय शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा एससीईआरटी हरियाणा एवं उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कक्षा 11 एवं 12 के विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ-साथ उद्यमशीलता का विकास करना तथा उन्हें एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम और व्यावसायिक अवधारणाओं से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना है।
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यार्थियों के स्टॉल्स का भ्रमण किया। उन्होंने प्रत्येक टीम को पूरा समय देते हुए उनके बिजनेस आइडियाज को ध्यानपूर्वक सुना तथा उत्पादों की सराहना की। शिक्षा मंत्री यह जानकर अत्यंत आश्चर्यचकित हुए कि एक टीम ने 40,000 रुपये का व्यवसाय कर 12,000 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों को तैयार करने के लिए विशेषकर वोकेशनल अध्यापकों की जमकर प्रशंसा की।
अपने संबोधन में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि “विकसित भारत की स्थापना की नींव इस कार्यक्रम से रखी जा चुकी है।” उन्होंने कहा कि अक्सर यह कहा जाता है कि बच्चे भविष्य के नागरिक होते हैं, लेकिन आज के ये विद्यार्थी इतने व्यावहारिक विचारों के साथ अपने पैरों पर खड़े होने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने अपना नागरिक कर्तव्य आज ही निभा दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस बात से अत्यंत प्रभावित हैं कि विद्यार्थी इतनी प्रभावी प्रस्तुतियाँ बना रहे हैं और व्यवसाय के जटिल विषयों को भी सहजता से समझा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब विद्यार्थी स्कूल स्तर पर ही इतना व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर लेंगे, तो वे अपने जीवन में कभी असफल नहीं होंगे।

शिक्षा मंत्री जीएमएसएसएस, बहादुरगढ़ की टीम द्वारा विकसित “रेसॉइल ऑर्गेनिक” नामक जैविक उर्वरक से विशेष रूप से प्रभावित हुए। इस उत्पाद से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और प्रति एकड़ उत्पादन में भी वृद्धि होती है। टीम के विद्यार्थियों ने बताया कि चीन की प्रति एकड़ पैदावार भारत से अधिक है तथा इस उर्वरक के प्रयोग से किसानों का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट 44 प्रतिशत से बढ़कर 104 प्रतिशत तक हो सकता है।विशिष्ट अतिथि डॉ. आई. वी. सुब्बा राव, सेवानिवृत्त आईएएस ने हरियाणा सरकार एवं शिक्षा विभाग की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार का कार्यक्रम वर्तमान में देश में कहीं और देखने को नहीं मिलता। उन्होंने इसे विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, नवाचारी और रोजगार-सृजक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
कार्यक्रम को दो प्रमुख भागों में विभाजित किया गया। पहले भाग में राज्य स्तर पर चयनित 66 टीमों ने अपने-अपने बिजनेस मॉडल्स का प्रदर्शन स्टॉल्स के माध्यम से किया। इन स्टॉल्स पर उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षकों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा स्वयं शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों से उनके बिजनेस मॉडल, राजस्व सृजन, विपणन रणनीति, लागत प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत संवाद किया।दूसरे भाग में चयनित टीमों के साथ विशेषज्ञ पैनल द्वारा निरंतर संवाद एवं इंटरव्यू सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विद्यार्थियों से उनके बिजनेस प्लान पर व्यावहारिक प्रश्न पूछे गए तथा उन्हें आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में हरियाणा के 22 जिलों से कुल 66 टीमों ने भाग लिया, जिसमें प्रत्येक जिले से तीन-तीन टीमों ने अपने-अपने स्टॉल्स में व्यापार, उद्योग एवं उत्पादन से संबंधित नवाचारी मॉडल प्रस्तुत किए। इन सभी 66 टीमों को अपने उद्यम के विकास के लिए सरकार द्वारा 1-1 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। इनमें से श्रेष्ठ 10 टीमों को मंच पर बुलाकर उद्योग विशेषज्ञों, निवेशकों, ज्यूरी सदस्यों एवं सरकारी अधिकारियों के समक्ष अपने-अपने मॉडल पर चर्चा करने का अवसर दिया गया। इन टीमों को इस कार्यक्रम के माध्यम से वित्तीय सहायता, अवसर, परामर्श तथा निरंतर सहयोग प्राप्त होगा।
कुशल बिजनेस चैलेंज 2.0 का मूल उद्देश्य “कार्य के साथ शिक्षा” को साकार करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी व्यापार, उद्योग, विपणन, लागत प्रबंधन, मूल्य निर्धारण, नवाचार, टीम प्रबंधन, संचार कौशल तथा समस्या समाधान जैसे महत्वपूर्ण जीवनोपयोगी कौशल सीख रहे हैं।
कार्यक्रम में शैक्षणिक सत्र 2024-25 में लगभग 37,000 विद्यार्थियों ने पूरे राज्य में इसमें भाग लिया था। वहीं इस वर्ष 2,500 से अधिक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में 66 मास्टर ट्रेनर्स की नियुक्ति की गई, जिन्होंने लगभग 7,000 अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया। इसके परिणामस्वरूप 1,18,000 विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम में पंजीकरण कराया, जिन्होंने 23,000 से अधिक टीमों का गठन कर अपने-अपने नए बिजनेस आइडियाज प्रस्तुत किए।
पीएम श्री गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कुंडली की टीम द्वारा विकसित पूर्णतः बायोडिग्रेडेबल पेन, जिसमें बीज भी लगा हुआ है और उपयोग के बाद फेंकने पर पौधा उग जाता है। ऐसे लगभग 1,500 पेन की बिक्री हो चुकी है। लाडवा की टीम ने वेबसाइट के माध्यम से “मदर्स टिफिन” सेवा की शुरुआत की, जबकि नूंह जिले की छात्राओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। जब शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों से पूछा कि क्या उनके परिवारजन इस प्रकार के व्यवसाय के लिए समर्थन करते हैं, तो विद्यार्थियों ने बताया कि सामान्यतः ऐसा नहीं होता, लेकिन जब सरकार ने समर्थन दिया तो परिवारों का विश्वास भी बढ़ा है।

कुशल बिजनेस चैलेंज- यूथ स्टार्ट-अप महोत्सव का यह राज्य स्तरीय सम्मेलन हरियाणा के राजकीय विद्यालयों में उद्यमशीलता की संस्कृति को सुदृढ़ करने तथा विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर एवं रोजगार-उन्मुख बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध हुआ।

