सरकार ने हीट-रेज़िलिएंट शहरी नियोजन को दी गति, सांसद कार्तिकेय शर्मा ने राज्यसभा में डेटा आधारित प्रगति को रेखांकित किया
पंचकूला जलवायु-संवेदनशील और भविष्य के अनुरूप शहरी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने सदन में बढ़ते शहरी ताप तनाव का विषय उठाया और नागरिकों की सुरक्षा तथा शहरों को अत्यधिक गर्मी से सुरक्षित बनाने हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी मांगी।
अनस्टार्ड प्रश्न के उत्तर में सरकार ने सदन को अवगत कराया कि शहरी हीट स्ट्रेस से निपटने के लिए एक व्यापक, विज्ञान-आधारित ढांचा पहले से लागू है। इसके तहत नियमित जलवायु और हीटवेव आकलन, मौसमी, मासिक और दीर्घावधि हीटवेव पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय हीटवेव संवेदनशीलता एटलस तथा हॉट वेदर हैज़र्ड मैप्स तैयार किए गए हैं। प्रत्येक ग्रीष्मकाल से पूर्व राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर हीटवेव तैयारियों की बैठकें भी आयोजित की जाती हैं।
सरकार ने बताया कि वर्ष 2019 से ही हीटवेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश लागू हैं। इसके परिणामस्वरूप देशभर में 23 राज्यों, 195 जिलों और 64 शहरों में हीट एक्शन प्लान तैयार किए जा चुके हैं, जिनका उद्देश्य अत्यधिक गर्मी के दौरान संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
शहरी नियोजन के विषय में सरकार ने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों के अधीन है, केंद्र सरकार वित्तीय और तकनीकी सहायता के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर जारी विभिन्न दिशानिर्देशों में शहरी हरित क्षेत्रों और अर्बन फॉरेस्ट का विस्तार, जल निकायों का संरक्षण, रिफ्लेक्टिव और क्लाइमेट-रेस्पॉन्सिव निर्माण सामग्री का उपयोग, सड़कों की उचित दिशा-निर्धारण, ग्रीन रूफ्स और सेमी-पर्वियस सतहों को बढ़ावा देने जैसे उपाय शामिल हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि हीट मिटीगेशन और जलवायु लचीलापन प्रमुख शहरी योजनाओं में व्यवस्थित रूप से जोड़ा जा रहा है। AMRUT के अंतर्गत 2,497 पार्क परियोजनाएं विकसित की गई हैं, जिनकी लागत ₹1,576.45 करोड़ रुपये है और जिनसे 5,277 एकड़ से अधिक हरित क्षेत्र जोड़ा गया है। AMRUT 2.0 के तहत 1,665 पार्क परियोजनाएं (1,117.48 करोड़) और 3,016 जल निकाय पुनर्जीवन परियोजनाएं (6,223.48 करोड़) स्वीकृत की गई हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत ग्रीन कॉरिडोर, रूफटॉप गार्डन और कूल पेवमेंट जैसी तकनीकों को अपनाया गया है, जबकि PMAY-Urban के तहत जलवायु-संवेदनशील और ऊर्जा-कुशल आवास को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, राज्यों को ब्लू और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्बन फॉरेस्ट, स्पॉन्ज सिटी प्लानिंग और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से जुड़े शहरी सुधारों के लिए विशेष प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत माइक्रो फॉरेस्ट और नगर वन जैसी पहलें भी शहरी ताप तनाव को कम करने में सहायक हैं।सरकार के विस्तृत उत्तर का स्वागत करते हुए सांसद कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि भारत शहरी नियोजन में जलवायु विज्ञान को शामिल करने की दिशा में सही और सकारात्मक मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।उन्होंने कहा, “नीतिगत ढांचा, डेटा और स्पष्ट दिशा मौजूद है। अब आवश्यकता है कि इन प्रयासों को तेज़ी और व्यापक स्तर पर ज़मीन पर उतारा जाए, ताकि नागरिकों को वास्तविक राहत मिल सके।”
शर्मा ने दोहराया कि हीट-रेज़िलिएंट शहर सार्वजनिक स्वास्थ्य, उत्पादकता और जीवन गुणवत्ता के लिए अनिवार्य हैं और यह सरकार के सतत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार भारत के विज़न के अनुरूप है।
समय पर भुगतान MSME के लिए जीवनरेखा है
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की आर्थिक स्थिरता और रोजगार सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने संसद में MSME को बड़े कॉरपोरेट्स, CPSEs और सरकारी विभागों द्वारा किए जा रहे भुगतान को समय पर करने की बात कही।राज्यसभा में सरकार ने विस्तृत, तथ्यात्मक और डेटा-आधारित उत्तर प्रस्तुत करते हुए बताया कि MSME भुगतान में देरी से निपटने के लिए कानूनी, वित्तीय और तकनीक आधारित कई मजबूत व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, CPSEs द्वारा MSME को देय कुल 17,400.13 करोड़ रुपये में से 14,744.54 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। 4 फरवरी 2026 तक शेष बकाया राशि 2,655.60 करोड़ रुपये है। साथ ही MSME समाधान पोर्टल पर पिछले तीन वर्षों में लंबित मामलों और संबंधित राशियों का वर्ष-वार विवरण भी सदन के पटल पर रखा गया।
सरकार ने बताया कि समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रावधान लागू हैं। 45 दिनों से अधिक देरी पर MSME को किया जाने वाला भुगतान आयकर में तभी मान्य होगा जब वास्तविक भुगतान किया जाए। इसके अतिरिक्त, कंपनियों को MSME के लंबित भुगतान का अर्धवार्षिक खुलासा करना अनिवार्य किया गया है। MSMED अधिनियम के तहत देरी पर RBI बैंक दर से तीन गुना ब्याज, वह भी मासिक चक्रवृद्धि आधार पर, देना अनिवार्य है।
विवादों के शीघ्र समाधान के लिए एक डिजिटल ऑनलाइन विवाद समाधान प्रणाली भी लागू की गई है, जिसके तहत अब सभी नए विलंबित भुगतान मामले ऑनलाइन दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि प्रक्रिया तेज़, पारदर्शी और कम लागत वाली हो।
कार्यशील पूंजी की समस्या को कम करने के लिए सरकार ने ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम के माध्यम से इनवॉयस फाइनेंसिंग में उल्लेखनीय विस्तार की जानकारी दी। पिछले तीन वर्षों में TReDS के माध्यम से MSME को मिलने वाली फंडिंग में तेज़ वृद्धि हुई है। बजट घोषणाओं के तहत CPSEs के लिए TReDS का उपयोग अनिवार्य किया गया है, इनवॉयस डिस्काउंटिंग पर क्रेडिट गारंटी का प्रावधान किया गया है और सरकारी खरीद डेटा को वित्तीय संस्थानों से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा सरकार ने MSME के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी, इक्विटी फंडिंग, बढ़ी हुई क्रेडिट गारंटी सीमा, निर्यातक MSME के लिए उच्च ऋण सीमा और उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत सूक्ष्म उद्यमों के लिए कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड जैसी पहलों को भी रेखांकित किया।सरकार के उत्तर का स्वागत करते हुए कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि समय पर भुगतान MSME के लिए जीवनरेखा है। सख्त प्रवर्तन, पारदर्शी सिस्टम और आसान वित्तीय पहुंच से ही रोजगार बचेगा और सप्लाई चेन मज़बूत होगी।”
शर्मा ने दोहराया कि संसद के माध्यम से निरंतर निगरानी और डेटा-आधारित नीति निर्माण MSME को सशक्त बनाने और उन्हें भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

