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नवरात्र मेले में एनआईए श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराएगा आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाएं

पंचकूला आयुष विभाग हरियाणा के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) विजेंद्र हुड्डा ने कहा कि आयुर्वेद निरोग जीवन में असरकारक है। योग-ध्यान और आहार-व्यवहार के जरिये व्यक्ति तनाव, अनिद्रा और अवसाद से राहत पा सकता है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला आयुर्वेद उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।उन्होंने गुरुवार को चैत्र नवरात्र के उपलक्ष्य में माता मनसा देवी मंदिर परिसर में शुरू हुए एनआईए के स्वास्थ्य जांच शिविर का विधिवत रूप से रीबन काटकर और दीप प्रज्वलित करके शुभारंभ किया। स्वास्थ्य जांच शिविर में पहुंचने पर उप चिकित्सा अधीक्षक (डीएमएस) डॉ. गौरव गर्ग ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया और प्रोफेसर प्रह्लाद रघु ने स्मृति चिन्ह भेंट किया।

आयुष विभाग के अतिरिक्त निदेशक विजेंद्र हुड्डा ने राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में आयुर्वेद पद्धतियों से किए जा रहे उपचार की सराहना की। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद उपचार रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक विकृतियों से मुक्ति दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयुर्वेद में जीवन जीने की शैली का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिसमें ऋतु परिवर्तन के अनुसार आहार-व्यवहार के साथ पूरी दिनचर्या बताई गई है।

डीएमएस डॉ. गौरव गर्ग ने बताया कि आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वाधान में संस्थान के कुलपति प्रोफेसर डॉ संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में वर्ष 2024 से चैत्र एवं शारदीय नवरात्री के पावन अवसर पर शिविर का आयोजन किया जा रहा है। 19 से 27 मार्च तक चलने वाले स्वास्थ्य जांच शिविर में श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की जांच करने के साथ जरूरतमंद लोगों को निशुल्क आयुर्वेदिक दवाइयां भी वितरित की जाएंगी। स्वास्थ्य शिविर का समन्वयक डॉ. अनुराग कुशल और डॉ. मानसी ग्रेवाल को नियुक्त किया गया है, जिनकी देखरेख में मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं केा मौसम में बदलाव के कारण होने वाली स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। इस अवसर पर डॉ. मनीष पमनानी, डॉ. समित मसंद, डॉ. अनूप, डॉ. अस्वति पी, डॉ. सुनीता यादव, एडीओ सतपाल तथा डॉ. राजेंद्र सहित स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।

आयुष विभाग हरियाणा के अतिरिक्त निदेशक विजेंद्र हुड्डा ने राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान का दौरा भी किया और आयुर्वेद उपचार पद्धतियों को जाना। उन्होंने ओपीडी, आईपीडी सेक्शन के साथ पंचकर्म, केंद्रीय लेबोरट्री, फिजियोथैरेपी और फार्मेसी का मुआयना किया। डॉ. गौरव गर्ग ने बताया कि संस्थान की 12 ओपीडी में हर रोज 400 से 500 मरीज परामर्श और इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनका विशेषज्ञ चिकित्सकों के जरिये इलाज किया जाता है।

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